पब्लिक वाणी खास खबर : उच्च शिक्षा विभाग का खेल, मंत्री को भी बायपास कर रहे अधिकारी

Public Vani Khas Khabar : मध्यप्रदेश के कॉलेजों में शिक्षकों की कमी के बीच उच्च शिक्षा विभाग के मुख्यालय में प्रोफेसरों की तैनाती पर सवाल उठे हैं। अटैचमेंट और सेवा रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

पब्लिक वाणी खास खबर : उच्च शिक्षा विभाग का खेल, मंत्री को भी बायपास कर रहे अधिकारी

नीरज गौर @ भोपाल

मध्यप्रदेश सरकार कॉलेजों में खाली पड़े पदों के लिए मप्र लोक सेवा आयोग से धीरे-धीरे भर्ती कर रही है, लेकिन अधिकारी नियुक्त होने वाले प्रोफेसरों से बाबूगिरी करा रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग में चल रहे खेल में अधिकारी अपने विभाग के मंत्री को भी बायपास कर मनमर्जी से नियुक्ति कर रहे हैं। प्रदेश के कॉलेजों में प्रोफेसरों के करीब दो हजार पद खाली पड़े हुए हैं। इससे कॉलेजों में पढ़ाने के लिए प्रोफेसर नहीं मिल रहे हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग में पीएससी के माध्यम से धीरे-धीरे भर्ती की जा रही है। इसमें चयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति कॉलेजों में पढ़ाने के लिए हुई, लेकिन विभागीय मुख्यालय सतपुड़ा भवन में चड़ी संख्या में असिस्टेंट प्रोफेसर बाबूगिरी में लगा दिए गए। इसके लिए विभागीय मंत्री इंदर सिंह परमार को जानकारी तक नहीं दी गई है। बताया जाता है कि इनमें कई ऐसे हैं, जिन्होंने कॉलेज में नियमित पढ़ाने का काम भी शुरू नहीं किया, बल्कि पहली नियुक्ति के साथ सतपुड़ा भवन या वल्लभ भवन में अटैचमेंट हासिल कर लिया। कुछ असिस्टेंट प्रोफेसरों की परिवीक्षा अवधि तक पूरी नहीं हुई है, लेकिन वे भी बाबूगिरी में लग गए है। ओएसडी के नाम पर नियुक्त होने वाले बाबू सतपुड़ा में बैठकर मैदानी अधिकारियों पर अपनी बाँस भी जमाने लगे हैं।

ओएसडी के 4 पद, लेकिन 45 को मिली नियुक्ति

सतपुड़ा भवन उच्च शिक्षा विभाग में ओएसडी के महज चार पद बताए जाते हैं, जबकि वर्तमान में करीब 45 प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर यहां सेवाएं दे रहे हैं। इनमें कुछ ओएसडी के रूप में तो कुछ उनके सहायक के तौर पर बाबूगिरी कर रहे हैं। इससे कॉलेजों में स्वीकृत पदों पर इनकी नियुक्ति दिखा कर भरे हुए बताए जाते है, जबकि हकीकत में यह पद खाली पड़े हुए हैं।

पहली नियुक्ति के साथ सतपुड़ा भवन में अटैचमेंट

उच्च शिक्षा विभाग में अविनाश प्रताप सिंह वर्ष 2019 में कॉलेज ज्वाइन करने के साथ ही सतपुड़ा भवन एवं वल्लभ भवन में अटैच हो गए। दाया है कि उनकी परिवीक्षा अवधि भी लंबे समय तक पूरी नहीं हुई। इसी तरह शैलेंद्र कुमार मेश्राम, आजाद अहमद मंसूरी, जैनुलुद्दीन जिलानी, विजय श्री बौद्ध और खेहा खरे के नाम भी वर्ष 2019 से सतपुड़ा भवन में अटैच शिक्षकों में बताए गए हैं। पूर्णिमा लोधावल वर्ष 2009 में सेवा में आई और 2017 से सतपुड़ा भवन में संलग्न बताई गई हैं। हाल में डॉ. अजय कुमार भारद्वाज, डॉ. मनीषा शर्मा, डॉ. राजेंद्र कुमार जुगादे, और डॉ. अमर कुमार नायक के सतपुड़ा भवन से अटैच हुए है।

दो माह के डिप्लॉयमेंट पर आए, सालों से यहीं जमे

विभागीय सूत्रों की माने तो कुछ शिक्षकों को महज दो माह के डिप्लॉयमेंट पर सतपुड़ा भवन बुलाया गया था। बाद में उनका अटैचमेंट लगातार चलता रहा। कॉलेज में उनका पद शो होने के कारण उस पद पर दूसरे शिक्षक की भती या पदस्थापना नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

तबादले के बाद भी मुख्यालय में जमे

वर्ष 2009 बैच के तुलसीराम दहायत का नवंबर 2025 में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल में स्थानांतरण किया गया था। बावजूद इसके वे सतपुड़ा भवन में अटैच है। इसी तरह प्रो. गंगाराम गांगले का स्थानांतरण शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उज्जैन हो चुका है लेकिन, वे भी मुख्यालय में जमें हुए है।

यूजीसी के नियमों का पालन नहीं

कॉलेजों में नियमित अध्यापन कार्य किए बिना सेवा अवधि पूरी करने, वरिष्ठ वेतनमान, प्रवर श्रेणी वेतनमान तथा एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पद पर पदोन्नति को लेकर यूजीसी नियमों के अनुरूपता पर भी सवाल है। ऐसे मामलों में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वेतन/लाभकी रिकवरी और नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान हो सकता है। हालांकि संबंधित शिक्षकों पर कार्रवाई या किसी लाभ की वसूली का अंतिम निष्कर्ष सक्षम विभागीय जांच के बाद ही तय होगा।

ई-सर्विस बुक में भी कई जानकारियां निल

ई-सर्विस बुक में कुछ शिक्षकों के सेवा रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध विवरण में संपूर्ण सेवाकाल में प्रतिनियुक्ति की जानकारी, पदस्थापना संबंधी जानकारी, वेतन निर्धारण, अवकाश, अन्य विभाग में सेवा और विदेश यात्रा जैसी प्रविष्टियां निल दर्शाई गई हैं। ऐसे में शिक्षकों के अटैचमेंट, पदस्थापना और सेवा लाभों का रिकॉर्ड किस आधार पर दर्ज किया गया, इसकी जांच भी होना चाहिए।