भोपाल में वायु प्रदूषण पर NGT सख्त, विभागों को 2 सप्ताह में जवाब देने के निर्देश; 18 नवंबर को अगली सुनवाई
मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण पर NGT ने संबंधित विभागों से दो सप्ताह में जवाब मांगा। भोपाल में PM10 घटा, जबकि इंदौर में बढ़ा। अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
भोपाल। मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। भोपाल में हुई सुनवाई के दौरान अधिकरण ने संबंधित विभागों को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट भी अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को होगी।
यह आदेश 13 अक्टूबर 2026 को NGT की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल ने मूल आवेदन क्रमांक 192/2025 (CZ) राशिद नूर खान बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य में दिया। सुनवाई में न्यायमूर्ति शियो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर विचार किया।
भोपाल में PM10 घटा, इंदौर में बढ़ा प्रदूषण
सुनवाई के दौरान पेश आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल में PM10 का वार्षिक औसत स्तर 2023-24 में 113 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो 2024-25 में घटकर 110 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। इस तरह करीब 3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
वहीं, इंदौर में स्थिति इसके उलट रही। यहां PM10 का स्तर 2023-24 में 99 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से बढ़कर 2024-25 में 108 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया। इन आंकड़ों के आधार पर प्रदूषण की नियमित निगरानी और प्रभावी नियंत्रण उपायों की जरूरत पर जोर दिया गया।
सड़क की धूल और वाहनों का धुआं प्रदूषण के प्रमुख स्रोत
प्रकरण में प्रस्तुत स्रोत निर्धारण अध्ययन के अनुसार, सड़क की धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियां और खुले में कचरा जलाना वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
NGT के समक्ष इन स्रोतों पर नियंत्रण के लिए कई उपायों की आवश्यकता बताई गई। इनमें शामिल हैं:
प्रदूषण के चिह्नित हॉटस्पॉट के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करना।
सड़क की धूल नियंत्रित करने के लिए सक्शन आधारित सफाई को प्राथमिकता देना।
सड़क किनारों और फुटपाथों की उचित व्यवस्था करना।
निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों की निगरानी और निर्माण कचरे का सही प्रबंधन करना।
वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण और खुले में कचरा जलाने की घटनाओं को रोकना।
वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों (CAAQMS) की संख्या और स्थानों की समीक्षा करना।
- त्योहारों में पटाखों पर नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश
- त्योहारों के दौरान पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा भी सुनवाई में उठा। अधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों, मध्य प्रदेश शासन के लागू नियमों और सुप्रीम कोर्ट के प्रासंगिक आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
- NGT ने स्पष्ट किया कि वायु गुणवत्ता खराब होने पर संबंधित स्तर के अनुरूप जरूरी प्रतिबंधात्मक और सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और नियमित निगरानी भी जरूरी है।
- AQI के स्तर के अनुसार कार्रवाई पर जोर
- सुनवाई के दौरान ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत वायु गुणवत्ता के अलग-अलग स्तरों पर कार्रवाई का विवरण भी प्रस्तुत किया गया। इसमें AQI के आधार पर मध्यम, खराब, अत्यंत खराब और गंभीर श्रेणियों के अनुरूप कदम उठाने की व्यवस्था बताई गई।
- अधिकरण ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए राज्य स्तरीय उच्चस्तरीय समिति और जिला स्तरीय समितियों के निर्णयों के अनुसार कार्रवाई करने पर भी जोर दिया। संबंधित अधिकारियों को 20 मई 2026 के पूर्व आदेश के अनुपालन में उठाए गए कदमों और आगे की कार्रवाई की रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले पेश करनी होगी।
- योजनाओं के साथ जमीन पर कार्रवाई भी जरूरी
- सुनवाई के दौरान अधिकारियों की ओर से बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए समय-समय पर बैठकें आयोजित की जा रही हैं और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, अधिकरण ने स्पष्ट किया कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई, नियमित निगरानी और तय समयसीमा में निर्देशों का पालन जरूरी है।
- अब संबंधित विभागों को दो सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब देना होगा। इसके बाद 18 नवंबर 2026 को होने वाली सुनवाई में प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों और आदेशों के अनुपालन की स्थिति पर आगे विचार किया जाएगा।

