नवरात्रि 2026 का पहला दिन : बगलामुखी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, हरसिद्धि- गढ़ कालिका मंदिर में विशेष पूजा

Navratri 2026 : बगलामुखी मंदिर में मंगला आरती के साथ दर्शन शुरू हो गए हैं। वहीं, उज्जैन के हरसिद्धि और गढ़ कालिका मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

नवरात्रि 2026 का पहला दिन : बगलामुखी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, हरसिद्धि- गढ़ कालिका मंदिर में  विशेष पूजा

Navratri 2026 First Day : मध्य प्रदेश। शारदीय नवरात्रि का पर्व 11 अक्टूबर से शुरू हो गया है। यह पर्व 19 अक्टूबर तक चलेगा। पहले दिन सुबह से ही मध्य प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भक्तों ने मां दुर्गा के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में मंगला आरती के साथ दर्शन शुरू हुए। उज्जैन के हरसिद्धि और गढ़ कालिका मंदिर में विशेष पूजा की गई। मैहर के मां शारदा धाम में नवरात्रि मेले का शुभारंभ हुआ। वहीं, सेंधवा के मां बड़ी बिजासन माता मंदिर के गर्भगृह की दीवारों को करीब 90 किलो चांदी से सजाया गया है।

बगलामुखी मंदिर में सुबह से भक्तों की भीड़

आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में सुबह 4 बजे से 11 बजे तक 75 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। मंदिर में सुबह 7 बजे से हवन और अनुष्ठान का दौर भी जारी रहा। भक्त मनोकामना पूर्ति, शत्रु पर विजय, गृह शांति और व्यापार में वृद्धि की कामना से हवन करा रहे हैं।

मंदिर के गर्भगृह के पीछे बनी यज्ञशालाओं में करीब 150 हवन कुंड हैं। मंदिर प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन हवन बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। नीमच के भादवा माता मंदिर में घट स्थापना से पहले महाआरती हुई। इस मंदिर को मालवा की वैष्णो देवी भी कहा जाता है।

मैहर और उमरिया के मंदिरों में विशेष आयोजन

मैहर स्थित मां शारदा धाम में रविवार तड़के 3 बजे मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंज उठा और शारदीय नवरात्रि मेले की शुरुआत हुई। उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित मां बिरासनी शक्तिपीठ में नवरात्रि के पहले दिन घट पूजन और स्थापना की गई। सेंधवा के मां बड़ी बिजासन माता मंदिर में चांदी से सजे गर्भगृह को देखने के लिए भी श्रद्धालुओं में उत्साह है। प्रदेश के इन प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही भक्त दर्शन और पूजन के लिए पहुंच रहे हैं।

रीवा के कालिका मंदिर में लंबी कतारें

रीवा के करीब 450 वर्ष पुराने रानी तालाब स्थित कालिका मंदिर में सुबह 3:30 बजे ही पट खोल दिए गए। सुबह 4 बजे से माता के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालु बारी-बारी से मंदिर में पहुंचकर पूजा कर रहे हैं। भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के लिए 25 जवान तैनात किए हैं। प्रशासन का उद्देश्य दर्शन व्यवस्था बनाए रखना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नवरात्रि के पहले दिन मंदिर में सुबह से ही उत्साह और भक्ति का माहौल बना हुआ है।

ग्वालियर के देवी मंदिरों में भी भक्तों का तांता

ग्वालियर से रिपोर्टर अरुण मोरे के अनुसार, शहर के प्रसिद्ध केला देवी मंदिर, मांढरे की माता मंदिर, छोटी वैष्णो देवी मंदिर और काली माता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भक्त माता की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद ले रहे हैं। नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही इन मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालु परिवार के साथ दर्शन करने पहुंच रहे हैं। मंदिरों में जयकारों और पूजा-पाठ के बीच पूरे शहर में पर्व का उत्साह दिखाई दे रहा है।

रायसेन के कंकाली धाम में मां की अनूठी प्रतिमा

रायसेन जिले के गुदावल गांव स्थित कंकाली धाम में भी नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्त कतार में लगकर मां कंकाली के दर्शन कर रहे हैं। इस मंदिर की सबसे खास बात मां काली की प्रतिमा है, जिसकी गर्दन करीब 45 डिग्री तक झुकी हुई है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, दशहरे के दिन माता की गर्दन कुछ क्षणों के लिए सीधी होती है। मंदिर समिति के मुताबिक, करीब 150 साल पहले गांव के एक पटेल को सपने में माता के दर्शन हुए थे। इसके बाद ग्रामीणों ने खुदाई की, जिसमें प्रतिमा मिली। बताया जाता है कि यह प्रतिमा वर्ष 1731 में निकाली गई थी।

कंकाली धाम में विराजमान हैं 20 भुजाओं वाली माता

कंकाली धाम में मां काली की 20 भुजाओं वाली प्रतिमा के साथ भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी विराजमान हैं। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर रायसेन से करीब 25 किलोमीटर और भोपाल से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित है। माता की अनूठी प्रतिमा और उससे जुड़ी मान्यताओं के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्त माता से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा

नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री की पूजा और घट स्थापना के साथ पर्व शुरू हुआ। 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा और 14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा की आराधना का कार्यक्रम है।

14 अक्टूबर को अमृत सिद्धि योग का भी उल्लेख किया गया है। 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता और 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी की पूजा होगी। 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की आराधना की जाएगी। 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि जारी रहने के साथ सुबह 8:27 बजे से अष्टमी शुरू होने की जानकारी दी गई है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी महत्व बताया गया है।

19 अक्टूबर को मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा का उल्लेख है। इस दिन कन्या पूजन, हवन और साधना को विशेष महत्व दिया गया है। नवरात्रि के दौरान भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा को तप और संयम, मां चंद्रघंटा की आराधना को साहस और शक्ति तथा मां कूष्मांडा की पूजा को आरोग्य और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है। मां स्कंदमाता की पूजा परिवार के कल्याण और संतान सुख के लिए की जाती है। वहीं, मां कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना भी नवरात्रि के धार्मिक महत्व का अहम हिस्सा है।