Kanha Tiger Reserve: कान्हा में 100 साल बाद जंगली भैंसों की वापसी, CM डॉ. मोहन यादव ने 8 भैंसों को बड़े बाड़े में छोड़ा

कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार में करीब 100 साल बाद जंगली भैंसों की वापसी की पहल हुई। CM मोहन यादव ने काजीरंगा से लाए गए 8 भैंसों को 17 हेक्टेयर के बाड़े में छोड़ा। तीन साल में 50 भैंसों को बसाने का लक्ष्य है।

Kanha Tiger Reserve: कान्हा में 100 साल बाद जंगली भैंसों की वापसी, CM डॉ. मोहन यादव ने 8 भैंसों को बड़े बाड़े में छोड़ा

Kanha Tiger Reserve Wild Buffalo News: मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में करीब 100 साल बाद जंगली भैंसों को फिर से बसाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। CM Dr. Mohan Yadav ने रविवार, 11 अक्टूबर को मंडला जिले के सूपखार परिक्षेत्र में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर में बने बड़े बाड़े में छोड़ा। इससे पहले इन भैंसों को एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े में क्वारंटाइन में रखा गया था। अब इन्हें बड़े क्षेत्र में रहकर स्थानीय वातावरण के अनुकूल होने का मौका मिलेगा।

राज्य सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में कान्हा क्षेत्र में कुल 50 जंगली भैंसों को फिर से बसाना है। इस परियोजना को मध्य प्रदेश में जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

काजीरंगा से 2200 किलोमीटर दूर लाए गए जंगली भैंसे

जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में आठ जंगली भैंसों को मध्य प्रदेश लाया गया। इनमें छह मादा और दो नर भैंसे शामिल हैं। इन्हें करीब 2200 किलोमीटर की दूरी तय कर कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र तक पहुंचाया गया।

पहले चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर भैंसे को एक हेक्टेयर के विशेष बाड़े में रखा गया था। इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर भैंसे को यहां लाया गया। सभी आठ भैंसों को क्वारंटाइन में रखकर स्थानीय जलवायु और पर्यावरण के अनुकूल होने का समय दिया गया।

क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद 11 अक्टूबर को इन्हें 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य जंगली भैंसों को प्राकृतिक परिस्थितियों के करीब का वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि आगे चलकर उन्हें जंगल में बसाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

तीन साल में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य

मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों से जंगली भैंसे लगभग एक सदी पहले विलुप्त हो चुके थे। सूपखार क्षेत्र में पहले इनकी मौजूदगी के प्रमाण मिलने के आधार पर वन विभाग ने यहां पुनर्स्थापना परियोजना शुरू की है।

परियोजना के तहत अगले तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को इस क्षेत्र में बसाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से भैंसों को लाने, उनकी निगरानी करने और उन्हें स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

इस पहल से कान्हा के वन क्षेत्र में वन्यजीव विविधता को मजबूत करने और एक महत्वपूर्ण प्रजाति को उसके पुराने प्राकृतिक आवास में फिर से स्थापित करने की उम्मीद है।

CM मोहन यादव बोले- मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण दिन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि करीब 100 वर्षों बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण शुरू हो रहा है। उन्होंने इस पहल में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विलुप्त हो चुकी वन्यजीव प्रजातियों को फिर से स्थापित कर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने वर्षाकाल समाप्त होने के बाद जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात भी कही।

वन्यजीव संरक्षण के साथ विकास पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के लिए उठाए जा रहे अन्य कदमों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को नौरादेही क्षेत्र में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य बनाकर चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल की गई है।

सरकार का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ इन क्षेत्रों में विकास की संभावनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा। कान्हा में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब इस परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जंगली भैंसे स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल किस तरह ढलते हैं और उन्हें प्राकृतिक आवास में स्थायी रूप से बसाने की प्रक्रिया कितनी सफल रहती है।