मऊगंज बना कच्ची महुआ शराब का हब : क्षेत्र में धधक रही भट्टियां, डिहिया-भीर-कुशहा, नईगढ़ी बने हॉटस्पॉट

Mauganj Mahua Liquor : इलाके में बन रही विषैली महुआ शराब कभी भी बन सकती है बड़े हादसे का कारण, जिम्मेदारों की चुप्पी से हौसले बुलंद

मऊगंज बना कच्ची महुआ शराब का हब : क्षेत्र में धधक रही भट्टियां, डिहिया-भीर-कुशहा, नईगढ़ी बने हॉटस्पॉट

राजेंद्र पयासी @ मऊगंज

मऊगंज जिला इन दिनों कच्ची महुआ शराब के हब के रूप में चर्चाओं में है। विशेषकर जिले के पूर्वी एवं उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र में अवैध हाथ-भट्टी महुआ शराब की भट्टियां खुलेआम धधक रही हैं और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली महज औपचारिकता बनकर रह गई है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार शाहपुर थाना क्षेत्र के अलावा नईगढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत डिहिया हरिजन बस्ती, भीर, कुशहा, चपगवां और जायसवाल बस्ती नईगढ़ी के अलावा क्षेत्र के दर्जनों गांव आज से नहीं, बल्कि बीते एक दशक से अवैध महुआ शराब के निर्माण और विक्रय के लिए चर्चित रहा है। 

आरोप है कि यदि महीने-दो महीने में की गई छोटी-मोटी दिखावटी कार्रवाई को छोड़ दिया जाए तो इतिहास गवाह है कि आबकारी विभाग आज तक इनमें से एक भी स्थाई अड्डे को पूरी तरह बंद कराने में सफल नहीं हो पाया है।

क्षेत्रीय नागरिकों के अनुसार आबकारी विभाग द्वारा पखवाड़े या महीने में एक-दो स्थानों पर कार्यवाही अवश्य की जाती है, कारोबारियों के विरुद्ध म.प्र. आबकारी अधिनियम तहत प्रकरण भी पंजीबद्ध किए जाते हैं, लेकिन कार्यवाही पर कई सवाल खड़े होते हैं। 

कार्रवाई के दौरान विभाग द्वारा जप्त की गई शराब की मात्रा बहुत कम दर्शाई जाती है, जबकि मौके पर निर्माण बड़े पैमाने पर होने की चर्चा है। वहीं जारी प्रेस विज्ञप्ति में अक्सर कारोबारी के पूरे नाम-पते का खुलासा नहीं किया जाता, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि कार्रवाई वास्तविक कारोबारी पर हुई या महज खानापूर्ति के लिए की गई।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस इलाके में निर्मित अवैध महुआ शराब अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गई है। सूत्र बताते हैं कि यह शराब संगठित तरीके से दूसरे थाना क्षेत्रों और यहां तक कि दूसरे जिलों तक भी पहुंचाई जा रही है। परिवहन के लिए मोटरसाइकिल व अन्य साधनों के उपयोग की चर्चा है। बावजूद इसके आज तक न तो कोई बड़ा रैकेट पकड़ा गया है और न ही सप्लाई चेन तोड़ने के लिए कोई बड़ी संयुक्त कार्रवाई की गई है।

सूत्रों के अनुसार महुआ से बनी कच्ची शराब में कई बार यूरिया जैसे हानिकारक रसायनों के उपयोग की आशंका जताई जाती है और निर्माण प्रक्रिया भी अस्वच्छ होती है। ऐसी विषैली शराब के सेवन से लीवर, किडनी पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और कई बार जनहानि जैसी बड़ी दुर्घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। मऊगंज में भी यह अवैध कारोबार किसी बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकता है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों का कहना है कि छोटे-मोटे प्रकरण बनाकर आंकड़ों की पूर्ति करने से इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लगेगा। आवश्यकता है कि आबकारी, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टास्क फोर्स बनाकर चिन्हित हॉटस्पॉट - डिहिया, भीर, कुशहा, चपगवां, जायसवाल बस्ती और शाहपुर, हनुमना, मऊगंज, देवतालाब थाना क्षेत्रों के अड्डों पर औचक छापेमार कार्यवाही की जाए, भट्टियों को मौके पर ही नष्ट किया जाए और मुख्य सरगनाओं के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई के साथ उनकी संपत्ति की भी जांच की जाए।

जिला प्रशासन से मांग है कि इस गंभीर विषय को प्राथमिकता पर लेकर प्रभावी अभियान चलाया जाए, ताकि मऊगंज पर लगा कच्ची शराब के हब का दाग मिट सके और युवा पीढ़ी को नशे के जाल से बचाया जा सके।

इस संबंध में जिला सहायक आबकारी अधिकारी अखिलेश्वर सिंह ठाकुर से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।